एक और बेचारी

        

             हर रोज़ की तरह , आज फिर घर में शान्ति थी ।  और शमां अपने दोनों “बच्चों के साथ सहमी हुई बैठी हुई थी” ।

        शराब में धुत्त  राजीव ने ज़ोर से दरवाज़े पर लात मारी ।           “उसने भी लपककर दरवाज़ा खोल दिया” और दिवार के साथ चिपक कर खड़ी हो गई  ।

राजीव ने अंदर पैर रखने से पहले ही गाली-गलौज शुरू कर दिया ।  

           एक के बाद एक “ऐसी शर्मनाक जो सीधे तीर की तरह सीने को भेद रही थी” । राजीव ने अपना सामान दरवाज़े पर ही  फेंक दिया और उल्टा-सीधा बोलता हुआ चारपाई पर लेट गया । 

बच्चे भी डरकर खड़े थे , “एक मुजरिम की तरह दरवाज़े की ओट में” ।

            शमां भी डरी सहमी खड़ी थी ।क्योंकि कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता था ,जब उसके ऊपर हाथ ना उठाता हो । चुपचाप आगे पड़ी मार खाती रहती । 

          सुबह होते ही राजीव का नशा उतर जाता । “बच्चों को प्यार से पुकारता , शमां को भी प्यार से बोलता” । 

           वह तो “प्यार के दो बोल सुनते ही सब मार भूल जाती  थी”। उसके शरीर का पूरा दर्द ही ग़ायब हो जाता । 

   वैसे तो शमां सरकारी स्कूल से बारहवीं पास थी ।

             फिर भी माँ-बाप ने बिना सोचे समझे “रिश्तेदारों के दबाव में आकर उसकी शादी कर दी” ।

       उसके कुछ करने के ख़्वाब तो उसी दिन दब गए थे । फिर तो “पता नहीं ज़िंदगी में क्या-क्या होता चला गया “। 

               बस ज़िंदगी उसे, और “वह ज़िंदगी को घसीटे जा रही थी”।ऐसे  ही दिन बित रहे थे । अब तो बच्चे भी बड़े हो गए थे ।

  “दुखों और खुशियों की आपस में खींचातानी चल रही थी” ।

                 अब एक नया दुख और शुरू हो गया । लड़का भी बुरी संगत में फँसकर नशेडी बन गया । साथ साथ  जुआँ खेलना ,चोरी करना । और तो और , घर में सामान भी  नहीं छोड़ा ।

          उधर जवान बेटी की शादी की भी चिंता, “आख़िर कौनसा अच्छा परिवार  शादी करने को तैयार होगा “।  

           इस बेक़सूर लड़की के हाथ पीले कैसे होंगे ? “क्या यह भी मेरी तरह ज़िंदगी जीयेगी” ? दिन-रात यही चिंता उसे खाने लगी ।

                 घर को बाप और भाई ने नर्क बना रखा था ।  बाहर लोगों के ताने , ऊपर से घूरतीं हुईं नज़रें । बीमार  माँ का दुख । 

        “उसकी बेटी की सहन शक्ति ने भी,  अब तो जवाब दे दिया” ।और आख़िर उसने घर में ही पंखे से लटक कर ख़ुदकुशी कर ली ।

    अचानक से “इतना बड़ा दुख  ज़िन्दगी में आ गया” ।

          देखते ही देखते कुछ दिनों में ही शमां ने भी खाट पकड़ ली । “हालात और बदतर हो गए” ।

 पर  बाप बेटा तो अलग ही दुनिया में जी रहे थे ।

             और फिर एक दिन ,  “एक और बेचारी इस दुनिया से विदा हो गई” ।  शायद दुनिया की किताब में दुनिया के लिए ,  एक दुःखद कहानी  फिर से  जुड गई  ॥

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

दहलीज़

हैप्पी लास्ट दिन

घर के दरवाज़े