छोटे सिपाही की शानदार जीत
वह दस- ग्यारह साल का लड़का ही था शायद । “जो गाड़ियों के रूकते ही भाग कर जाता था” । फिर गाड़ी साफ़ करने वाले, कपड़े बेचना शुरू कर देता ।
‘‘कपड़े को ज़ोर ज़ोर से रगड़ कर, उसका असर दिखाता’’ ।
खिड़की पर हाथों से इशारा करके बेचने की कोशिश करता था । ‘‘कुछ ख़रीद कर जाते कुछ अपना मुँह, दूसरी तरफ़ फेर लेते’’ ।
हर रोज़ ज़्यादातर उसको यही करते हुए देख रही थी ।
अचानक दो तीन दिन बाद ध्यान गया कि” वह लड़का कहीं नज़र ही नहीं आ रहा” ।
पीछे मुड़कर दूसरी गाड़ियों को भी देखा , “कहीं तो खड़ा होगा” ।
“उसकी मासूम सी शक्ल और उम्मीद से भरी आँखें “, मेरी आँखों के आगे घूमने लगी । इतने में लाइट-सिग्नल आ गया और तेज़ी से गाड़ी आगे बढ़ गई ।
दिन-भर उसके बारे में कई बार सोचा ,”आख़िर कहाँ गया होगा” ?
वापिस गाँव गया होगा ? बीमार तो नहीं है। ‘मेरा उससे कोई रिश्ता नहीं था’ , फिर भी पता नहीं क्यों ध्यान उधर ही रहा।
ऐसे ही बहुत समय बीत गया । “वह लड़का कभी दिखाई नहीं दिया” ।
एक दिन चलते-चलते ही चप्पल टूट गई । ‘बाज़ार में दूर तक कोई मोची भी नहीं दिख रहा था’ । ऊपर से गर्मी बहुत थी ।
“जैसे-तैसे सड़क के आख़िरी छोर तक पहुँच गई” ।
तभी “मोची की छोटी सी दुकान” दिखाई दी । चैन की साँस ली देखकर । ‘छोटा सा लड़का एक औरत के साथ बैठा हुआ था’ ।
मैंने कहा चप्पल ठीक करवानी है ।अपने पापा को बुला दो ।
मेरी आवाज़ सुनते ही , बच्चे ने सिर ऊपर उठाया । बोला— “मैं ही ठीक करता हूँ , मेरे पापा नहीं है” ।
“यह मेरी माँ और मेरी दुकान है”।
कृपया अपनी चप्पल निकालकर दे दो ।
मेरी ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था । ‘उस बच्चे को उस जगह पर बैठा देखकर’ ।
वही बच्चा जो कुछ महीने पहले भाग-भागकर कपड़े बेचा करता था ।जिसका डर लगा रहता था ।
“कभी किसी गाड़ी के नीचे ना आजाए “।
आज दुकान जमा कर बैठा है । ‘दिल तो किया उसे गले लगा लूँ’ । ‘पर समाज और हमारे बीच की खाई’ ने, रोक लिया ।
ख़ुशी से आंखें नम हो गई । “छोटे सिपाही की शानदार जीत” देखकर ।
आख़िर उसने हौसला नहीं छोड़ा । भीख माँग कर नहीं खाया । “और आगे भी माँगने की कभी ज़रूरत नहीं पड़ेगी” ।
घर पहुँचने तक बहुत बार उसे मुड-मुड़ कर देखा । मेरा दिल उसे, मन ही मन , ‘जीत की बधाई देता रहा’ ।।
Too gud
ReplyDeleteSensitive story 👍
ReplyDelete👍
ReplyDeleteVery Nice
ReplyDeleteInspirational story
ReplyDeleteIt’s great
ReplyDeleteBeautiful creation ma’am
ReplyDeleteEach & every soul is a part & parcel of the supreme soul i.e. God who is powerful, prevalent, pure, perfect, permanent, peaceful and pleasurable. the same qualities exist in a soul. So it is natural & instinctive to reflect such behaviour. Manju has depicted the same throughout the story very beautifully.
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