नन्हा सा दोस्त
सुजाता को दादी ने ही पाल-पोस कर बड़ा किया था । “वह, पापा और भाई रोहन , दादा-दादी के साथ ही रहते थे” ।
सबकी लाड़ली थी सुजाता । “घर में भाई के साथ लड़ती भी ख़ुद थी और उसको डांट भी पड़वा देती थी” ।
जब वह पैदा हुई थी तो, उसकी माँ का अस्पताल में ही देहांत हो गया था । तभी से उसकी दादी ने ही, माँ बनकर बच्चों को संभाला ।
“सुजाता के पापा ने दूसरी शादी से साफ़ इंकार कर दिया” । किसी के समझाने से भी नहीं माने ।
सब ऐसे ही चलता रहा । “सुजाता अपनी दादी के बिना ना सोती थी, ना खाती थी” । बहुत लाड़ प्यार से पल रहे थे दोनों बच्चे।
“दोनों बहन भाई एक ही स्कूल में जाते थे”।
एक दिन स्कूल गए तो साथ थे । “पर जब छुट्टी हुई तो सुजाता बस के पास नहीं आयी” । टीचर ने, चपरासी ने , बस ड्राइवर ने सबने बहुत ढूंढा ।
“सुजाता के भाई रोहन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया” । स्कूल में अनाउंसमेंट की गई । स्कूल मैनेजमेंट को फ़ोन किया गया ।
“सब एक-एक करके ऑफ़िस में इकट्ठे हो गए” ।
सबने सलाह- मशवरा किया कि सुजाता के पापा को फ़ोन करके बताया जाए ।
तब एक टीचर ने बोला — पहले हम सब क्लास रूम, बाथरूम वग़ैरह सब स्थान पर चेक कर लें ।
तो फिर सभी ने सब जगह जाकर देखना शुरू कर दिया । “पर सब ख़ाली हाथ लौटकर बरामदे में इकट्ठा हो गए” ।
तभी किसी ने रोने की आवाज़ सुनी ।
जो कहीं पास की झाड़ियों की तरफ़ से ही आ रही थी । “एक बार तो सभी डर गए और एक-दूसरे का मुँह देखने लगे” ।
फिर सब मिलकर आवाज़ को सुनते हुए बड़े पेड़ के पास पहुँच गए ।
वह सुजाता ही थी । “जो चिड़िया के छोटे से बच्चे को गोद में लेकर रोये जा रही थी” ।
और पास ही एक चिड़िया भी पड़ी हुई थी । “किसी बड़े पक्षी ने उसे मार कर पेड़ से गिरा दिया था” । और उसके साथ-साथ वह चिड़िया का बच्चा भी नीचे गिर गया ।
सुजाता ने उसे गिरते हुए देख लिया और “भाग कर उठाकर हाथों में ले लिया” ।
रोहन ने पूछा —पर तुम रो क्यों रही हो ? “उसने रोते हुए कहा—अब इसकी भी मम्मी नहीं रही”। इसके तो दादा- दादी भी नहीं है ।
“इसके तो पापा भी नहीं दिख रहे । अब यह कहाँ जायेगा ? हम इसको साथ लेकर चले क्या ?” इसको भी तो परिवार चाहिए ।
“सब लोगों की आँखों में पानी आ चुका था” । सुजाता को रोते हुए देखकर , उसके मासूम से सवालों को सुनकर ।
“पहले तो सबने चैन की साँस ली कि सुजाता मिल गई” । नहीं तो इनके पापा और दादा-दादी को क्या जवाब देते ।
“ भागकर क्लास टीचर ने सुजाता को गले से लगा लिया” । प्यार से सहलाकर चुप करवाया ।
फिर बोला — हाँ हाँ क्यों नहीं । हम इसको साथ लेकर ही जाएँगे । “चिड़िया का बच्चा भी आराम से सुजाता की हथेलियों में सिमटा बैठा रहा” ।
शायद ख़ुद को सुरक्षित महसूस कर रहा था ।
“ सुजाता अपनी तुलना चिड़िया के बच्चे से कर रही थी” । अपना सारा सामान अपने भाई को पकड़ा कर , भाग कर बस में बैठ गई ।
बहुत ख़ुश थी वह । “ एक नन्हा सा दोस्त अपने साथ लेकर जा रही थी” । जिसके लिए सुजाता ने घर और परिवार दोनों ढूंढ लिये थे ।।
Super
ReplyDeleteAmazing
ReplyDeleteNice one mam
ReplyDeleteStory is Deeply touching
Very nice creation
ReplyDeleteThis is me your bhai
ReplyDeleteNo words man 👏
ReplyDeleteFine, the mother is the incarnation & personification of God, for the all-round development of a child, a mother's love & affection is a must, a sufferer person can understand, feel & realise this in a better way, Manju has composed the tale on heart rendering issue very attentively.
ReplyDeleteHeart rendingng
ReplyDeleteHeart-rending
DeleteWell written
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteGud
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