फादर्स डे अधूरा ही रह गया
सब बच्चे उनसे बात करने के लिए फ़ोन कर रहे थे । आज फादर्स डे था ना इसलिए । “उनको भी पहले, कहाँ ही पता था। बिल्कुल अनजान थे इससे ।
“पहला फ़ोन आया तो पता चला कि आज फादर्स डे हैं” ।
फिर तो उनका ध्यान फ़ोन पर ही रहा ।
क्या पता “कब फ़ोन की घंटी बजे और उनको सुनाई न दे” । अपनी दिनचर्या निपटाकर ,खाना खाकर अपनी मित्र मंडली के पास जाने को तैयार तैयार होने लगे ।
“चलने से पहले अपने फ़ोन की घंटी देखीं, कभी धीरे हो गई हो” ।
दोस्तों के पास पहुँचते ही सबको फादर्स डे की बधाई भी दी । फिर बोलते —“लो भाई एक त्योहार और होने लगा अब तो” ।
फिर एक और दोस्त ने बताया “आज खाना भी स्पेशल तैयार करवाया है बच्चों ने” ।
फिर सब अपने अपने क़िस्से-कहानी बताते रहे ।
पर आदित्य के पापा बेचैन होकर बार-बार फ़ोन खोलकर देखते रहे । तभी दोस्त ने पूछा — “सब ठीक है ना । कोई चिंता की बात तो नहीं” ।
नहीं नहीं सब ठीक है । धीरे से बोला — और अपना फ़ोन जेब में डाल लिया ।
“फिर एकदम से फ़ोन की घंटी बजीं, लेकिन दोस्त के फ़ोन की थी” । उनको लगा उनका फ़ोन है । झट से जेब में हाथ डाला ।
दोस्त ने कहा — “अरे ये तो मेरा फ़ोन है । आप घबरा क्यों गए” ।
कैसे बताएँ सबको - सालों से दूर गए एक बेटे के फ़ोन का इंतज़ार कर रहा हूँ । “ पता भी नहीं है कहाँ रहता है” । बस कभी-कभी फ़ोन कर देता है ।
हाल-चाल पूछ लेता है ।“अपना पूछते ही फ़ोन रख देता है”।
क्या उसको पता होगा आज फादर्स डे है । “शायद सुनता तो होगा ही , आस पास रहने वालों से” ।
“एक दिन साधुओं की टोली के साथ चला गया था । सबको छोड़कर” । रिश्तों में बँधना ही नहीं चाहता था ।
“बहुत रोकना चाहा पर नहीं रूका” ।
छोड़कर चला गया । दो-तीन साल में फ़ोन कर देता है।” वह भी किसी दुकान से, फ़ोन नंबर भी नहीं बताता ” ।
पापा सोचते-सोचते सबको अलविदा कहकर घर की तरफ़ चल दिए । “हाथ जेब में ही डाल रखा था” ।
फ़ोन के आने की उम्मीद अब भी ख़त्म नहीं हुई थी ।
घर पहुँचते पोते पूर्व ने दादा के पैर पकड़कर फादर्स डे विश किया । “उसने भी दादा की बेचैनी समझ ली थी कि चाचा को याद कर रहे हैं” ।
केक भी लेकर आया हुआ था ।”ताकि उनका मन थोड़ा ठीक हो जाए” ।
पूर्व के सामने तो सहज ही रहे । पर बेचैनी चल रही थी मन में । “खुलकर बात भी नहीं करना चाहते थे” । खाना खाकर सोने के लिए चल दिये ।
“ फ़ोन को सिरहाने ही रख लिया वो भी पूरी आवाज़ करके” ।
इंतज़ार अब तक बाक़ी था शायद ।
फिर लाइट बंद करके पलंग पर लेट गए । ख़ुद को ही बड़बड़ाते हुए बोले —“ काश ! पता ही नहीं चलता कि फादर्स डे भी होता है” ।
“आज तो ‘ फादर्स डे अधूरा ही रह गया” ।।
Super se bhi upper
ReplyDeleteNo words mam
ReplyDelete👌👌
Wonderful ♥️
ReplyDeleteToo good well written Mam
ReplyDeleteHeart touching
ReplyDeleteAwesome
ReplyDeleteThis is the generation gap, the strong relationship between Father and son can not be understood by the son, until & unless he becomes a father of a child. This is the universal question raised by Manju.
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