सन्नाटे के साथ अंधेरा


               उठो ना , देखो तो — तुमसे मिलने  कौन आया है । यह सब बोलते हुए , “उस बेजान शरीर को बिठाने की कोशिश करने लगे” ।

       राकेश को पूरी उम्मीद थी कि उनकी आवाज़ सुनकर वह “आंखें खोलेगी और बैठने के लिए  हाँ  भी भर देगी” ।

                  आस-पास खड़े सब लोग दोनों को देखे जा रहे थे । सबके चेहरे पर मिलेजुले भाव थे । 

        तभी  उसकी माँ ने बोला— रहने दो । “यह  सोना चाहती हैं ,जब ख़ुद उठेगी तब बात कर लेगी” ।

     और फिर सब  एक-एक करके कमरे से बाहर आ गए ।   

                 शीला ऐसे ही चुपचाप लेटी रही ।   “सच में सो रही थी और उसके खर्राटे भी धीरे-धीरे सुन रहे थे”  । इससे मन  को तसल्ली मिली कि स्वस्थ है।  सच में ही सो रही है ।

                  बाहर बैठे सब उन्हीं की बातें करते रहे । क्या खाया ।  आज किस टाइम उठकर बैठी । सबसे बात की या  नहीं । “एक दूसरे को तसल्ली दे रहे थे  कि सब ठीक हैं” ।

                चिंता  की बात नहीं है । पर सबकी आँखें और चेहरे के भाव उनके अंदर के डर को भी दिखा रहे थे । 

     जो वह एक-दूसरे से छुपाना चाहते थे । 

                  सब विषय ढूंढ-ढूंढकर   बात कर रहे थे । “यूँ कहें कि बातें करने को कुछ मिल ही नहीं रहा था , घुमाफिर कर शीला की ही बात कर रहे थे ” ।

         “सबके कान  शीला के कमरे  की तरफ़ ही थे” ।कब  कुछ शोर सुनाई दे ।आवाज़ लगाने के लिए ।

                   ऐसा प्रतीत हो रहा था  जैसे हम  गहरे अंधकार वाले कमरे में बैठे हैं । और रोशनी की हल्की सी झलक की बाट  देख रहे हो । 

        “कब कोई बत्ती जला दे या फिर दरवाज़े खिड़की खोलकर उजाला कर दे , उस अंधेरे कमरे में आकर ” ।

                   अचानक धीरे-धीरे  पुकारने की आवाज़ सुनाई दी । “सबने एक-दूसरे को देखा और फिर एक साथ ही शीला  के कमरे की तरफ़ दौड़ पड़े” ।

                   बहुत इंतज़ार के बाद आवाज़ आई उसकी  । “सब डरे हुए थे” । कमरे के भीतर जाते ही उसने हल्के से मुस्कराकर पानी की तरफ़ इशारा किया । 

         हाथ को भी पकड़ने के लिए आगे बढाया । बहुत सुकुन  मिला देखकर । “वह ठीक है  सुधार तो हो रहा है” ।

           उसकी मुस्कराहट देख कर सबके चेहरे पर भी मुस्कराहट आ गयी । 

             “उम्मीद जो जाग गई थी सबकी , अब शायद शीला ठीक हो रही है” ।  दवाईयॉं असर कर गई शायद ,लग तो यही रहा है ।

                   तभी  कमरे के परदे हटाकर थोड़ी रोशनी करने की कोशिश की । “मगर शीला ने उनको हाथ से इशारा करके बंद करवा दिए”।  

      मुझे रोशनी नहीं चाहिए बंद कर दो ।

                 लेकिन शीला के पति को यह था कि थोड़ा-बहुत बाहर की रोशनी दिखाई देती रहे ।  यह जल्दी स्वस्थ हो जायेगी । “शायद तरो-ताज़ा भी महसूस करे” ।

    कमरे में रोशनी हुई तो लेकिन ज़्यादा देर के लिए ही नहीं ।    

                “अचानक अगले दिन ही शीला की तबियत पहले से भी ज़्यादा बिगड़ गई” ।,समझ ही नहीं आया सबको ये कैसे हो गया ।,

                  “सही दिशा में इलाज चल रहा है फिर भी तबियत  हर पल बिगड़ती जा रही थी” । भाग-दौड़ करके अस्पताल तक पहुँचे ।  

          जल्दी-जल्दी डॉक्टरों ने टीम को  बुला कर इलाज भी शुरू कर दिया । 

               “पूरी रात यूँ ही इंतज़ार में कट गई” ।  उसकी बेचैनी  और उसका तड़पना  देखी नहीं जा रही थी । “सुबह होते ही डॉक्टर ने आते ही,  अचानक सबको कमरे से बाहर भेज दिया” ।

            “आख़िरी कोशिश जो करनी थी डाक्टर को , उसकी साँसें वापिस लाने के लिए” । सबसे गुज़ारिश की, कि आप सब कमरे से बाहर चले जाए । 

     “कृपया हमें अपना काम करने दे”।

              सब  एक-एक  करके कमरे से बाहर चले गए ।  “तभी सबको मशीन की लंबी सी आवाज़ सुनाई दी । जो एहसास दिला रही थी सब ख़त्म” ।

      अब शीला नहीं रही ।  

                “सब उम्मीदें सब दुआयें यूँ ही रह गई” ।और  अब उस कमरे में  रोशनी होते हुए भी  ‘सन्नाटे के साथ अंधेरा’   मिल गया ” ।।

     

Comments

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  2. An excellent edition to your previous story
    Very well written

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  3. It's well explained nd near to realty 👌👌

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  4. Really you are very good writer

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  5. We were waiting for your post
    It’s real life of someone very close to us

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  6. It's reality 👍👍 good job 👍👍

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  7. Life is transitory - every human being is subject to lust, anger, greed, attachment & jealousy during his life span. Near death such vices start flowing away & human beings become subservient to the pure soul, so always remember God & death so that one may stay away from these vices. One should not be afraid of death as it is like a long sleep.

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