अचूक मंत्र
अरे , यह तो रमेश चाचा हैं । “लेकिन बारिश में क्यों घूम रहे हैं” ? सिर पर बोरी ओढ़कर बारिश से बचने की कोशिश में भी है ।
“पाजामा भी घुटनों तक चढ़ा रखा है” ।
चप्पलें हाथ में लटकाकर, गीली मिट्टी से बचना चाह रहे है ।
दूर से तो ऐसा लग रहा है “जैसे पेड़ों के नीचे रुककर कुछ ढूँढ रहे हैं, चौकन्नी सी नज़रों से” ।
एक-एक जगह को देखते चल रहे है ।
“बहुत देर तक उनको ही देखती रही ,टकटकी लगाकर” ।
कहीं उनको कोई परेशानी तो नहीं है ? “लेकिन इतनी दूर से आवाज़ भी लगाती तो शायद वो नहीं सुन सकते” ।
चुपचाप उनकी गतिविधियों को ही देखती रही ।
“उनके पैर बारिश से बने कीचड़ में धँस कर चल रहे थे” ।
दिखाई दे रहा था पैरों पर मिट्टी चढ़ी हुई है । “कपड़ों पर ऊपर तक मिट्टी के छींटे गए हुए हैं ” ।
तभी एक ज़ोर से आवाज़ आयी और चाचा ने उसको उत्तर भी दिया । “और फिर तेज़ तेज़ क़दमों से देखना शुरू कर दिया” ।
“जैसे उनकी ज़िम्मेदारी याद दिला दी गई हो” ।
नहीं रुका गया मुझसे भी । ऐसा क्या था जो किसी की आवाज़ आयी “और चाचा ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी” ।
मैंने भी अपनी छाता उठायी और उस दीवार तक पहुँच गया जहाँ से फलों के पेड़ शुरू होते हैं । “सारा माजरा समझ आ गया वहाँ पर जाते ही” ।
पास जाकर देखा । “रमेश चाचा तो पानी से ,आँधी में गिरे फल इकट्ठे कर रहे थे” ।
इसलिए बारीकी से ढूंढते हुए चल रहे थे कहीं कोई छूट न जाए । फल “कीचड़ में गिरने से ख़राब जो हो जाते हैं” । इसलिए उनको जल्दी से जल्दी उठाना चाहते थे ।
उन्होने एक बड़ी-सी टोकरी में ढेर लगा रखा था ।
“इकट्ठे करते हुए मुझे देख हँस कर बोले” । आ गए आप भी । “यह लो आप भी बच्चों के लिए ले जाना” ।
हाथ में ही पकड़ा दिए और फिर से अपने उसी काम पर लग गये । “अपनी बढ़ती उम्र को दरकिनार कर उसी आत्मविश्वास के साथ” ।
फिर अपने सिर पर बोरी को अच्छे से लगाया और फिर से ढूँढना शुरू कर दिया ।
“एक नया , ज़िंदगी जीने का मंत्र देकर ,दूसरी तरफ़ ढूँढने चले गए” । साथ-साथ बोलते जा रहे थे रुकना नहीं है जब तक मैं सारे इकट्ठे ना कर लूँ ।
“बातें करने के लिए कल समय निकालेंगे ।अभी तो बहुत काम है”।
और मैं एक हाथ में फल और एक हाथ में छाता पकड़े अपने घर की तरफ़ चल पड़ी । चाचा के बारे में सोचती चल रही थी ।
वह इस उम्र में भी अपने आपको उम्रदराज़ नहीं सोचना चाहते । “और हमें घर तक पहुँचने में भी दिक़्क़त हो रही थी” ।
“काम करने की उम्र और समय नहीं होता”। बस अंदर से काम करने की लगन जगानी पड़ती है ।
“रमेश चाचा का यह “अचूक मंत्र” मेरे दिलो-दिमाग़ में शायद हमेशा के लिए बैठ गया” ॥ ॥
Right ji
ReplyDeleteamazing story ma'am
ReplyDeleteGood one
ReplyDeleteWell written 👏
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteSuper
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