थोड़ी देर के लिए
इतना तो सोचा ही नहीं था कि सर्दियों में भी मॉनसून जैसी बारिश हो सकती है ।
“इस साल तो झड़ भी ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा” ।
कल रात ही तो आंगन और दुकान की सफ़ाई की थी । “सुबह उठते फिर वैसा का वैसा” ।
सारे लोग शायद घरों के बाहर ही खड़े थे। क्योंकि शोर बहुत आ रहा था । “बच्चों के हंसने चीखने की आवाजें भी आ रही थी” ।
पहले तो लगा -पता नहीं क्या ही हो गया होगा ।
लेकिन साथ वालों की आवाज़ें भी सुनी । “फिर खाट से जैसे-तैसे उठकर दरवाज़ा खोला क्योंकि नींद तो टूट ही गई थी” ।
अरे ये क्या ? “सारा आँगन, दुकान की छत , सब ओलों से भरी पड़ी थी”।
“ज़मीन तो दिख ही नहीं रही थी” ।
बस सफ़ेद बर्फ़ की चादर फैल गई । “ख़ुशी भी हुई देखकर , बहुत सालों बाद दिखाई दिया यह नज़ारा” ।
कभी छोटे होते थे । तब भाई बहनों के साथ मस्ती करते थे ।
“साथ वालों के बच्चों ने तो बाल्टी भर डाली थी । देख कर हँसी आ गईं” ।
“ लेकिन थोड़ी देर के लिये तो ख़ुशी काफूर हो गई”। क्योंकि रामधन की सारी सब्ज़ी फ़सल बर्बाद हो चुकी थी । “सब फसलें खेतों में बिछ गई ही गईं ।
“जैसे किसी ने डंडा लेकर गिरा दी” ।
अबकी बार तो उधार भी लिया था जो फ़सल पकने पर वापस करना था । और दूसरा कोई काम धंधा था ही नहीं उसके पास
तभी रामधन की बेटी ने हाथ से हिलाया चलो ना पापा —खेलते हैं ।
कितनी बर्फ़ पड़ी है । लोग बता रहे हैं कि शिमला में ऐसे ही सब सफ़ेद हो जाता है चारों तरफ़ बर्फ़ ही बर्फ़ - देखो आकर ।
“नाच-नाच कर बोलती रही” ।
फिर हाथ में उठा-उठाकर अपने झोली भरनी शुरू कर दी । इस छोटी बच्ची को क्या पता कि हमारे लिए यह ख़ुशी बनकर नहीं आयी ।
“हमें तो एक साल पीछे फेंक दिया फिर से” ।
लेकिन रामधन बच्ची के अरमान नहीं तोड़ना चाहता था । “जो होना था वो तो हो ही गया” ।
अभी तो सही नहीं हो सकता ।
“लेकिन बेटी के लिए उसका बचपन यादगार रहना चाहिए जैसे मुझे याद है” ।
उसके लिए तो नया एहसास था जो वह नहीं छीनना चाहता था । यह एहसास उसको सारी उमर याद रहेगा ।
“फिर बच्चों की तरह भाग-भागकर ,बर्फ़ उठा-उठाकर एक-दूसरे पर फेंकना शुरू कर दिया” ।
इकट्ठे कर-करके ढेर लगा लिया । “बाल्टियां बर्तन सब भर दिए”।
“बेटी की इस बेख़ौफ़ हँसी ने “थोड़ी देर के लिए” ही सही सारे दुख भुला दिये” ।
“दोनों ने एक दूसरे को इशारा किया कि इसके मासूम बचपन की यादों में इसके साथ जी लेते हैं” । अब नुक़सान बाद में ही सँभालेंगे ।
फिर दोनों मियाँ-बीबी बच्ची के साथ बच्चे बनकर खेलते- खेलते ओलों में लोटपोट होते रहे ॥
Well written
ReplyDeleteToo gud
ReplyDeleteWell explained mam
ReplyDeleteThand aane wali hai
ReplyDeleteNice one
ReplyDeleteWell written
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