उसकी खुशियों की चाबी

                    आज ही नीचे पार्क में घूमते देखा उनको । अकेली नहीं थी । “छोटी बच्ची थी साथ में , यही कुछ चार- पाँच साल की होगी” । 

      उसके साथ इतनी ज़्यादा व्यस्त थी कि “आने-जाने वालों को भी नहीं देख रही थी” ।

                   बस उसको ही निहार रही थी । “और बच्ची भी अपनी एक -एक चीज़ दिखा रही थी । दादी —देखो मेरी क्लिप्स , देखो मेरी चूड़ियाँ” । 

    “अरे दादी- आपने सेंडिल तो  देखीं ही नहीं”।

                   और वह इन सब में इतनी खोईं हुई थी कि मेरे बार- बार पुकारने पर भी नहीं सुना । “तब मैंने पास जाकर कंधे से हिलाया” ।

  कब से आपको आवाज़ लगा रही हूँ । आपको पता ही नहीं चल रहा ।

                    “पीछे मुड़कर कर चहक कर बोली —देखो यह मेरी पोती है” । पाँच साल की हो जाएगी इसी महीने । आज ही आयी है ।

     “दो-तीन दिन  रहेगी मेरे पास” ।

                   फिर बच्ची से मिलवाया । “उसने भी मुस्कुराकर नमस्ते किया और पीछे मुड़कर दादी के  दुपट्टे से  लिपट गई” । 

      आज तक इतना ख़ुश कभी नहीं देखा उनको । “जैसे ख़ुश रहने का मौक़ा  मिल गया हो”  ।

                 मैंने पूछा —बहू-बेटा साथ रहने लगे क्या ?  बहुत अच्छा है फिर तो । “अब तो आपको भी व्यस्त रहने का बहाना मिल जाएगा” ।

     “यह सुनते ही उदास हो गयी” । 

                नहीं नहीं  —अभी डिवोर्स चल रहा है कोर्ट में । महीने में  दो-तीन दिन पोती हमारे पास आती है 

     “दो तीन दिनों में ही महीने भर की ख़ुशियाँ बटोर लेती हूँ” ।

       फिर पोती को गले लगाकर  हँसते हुए बोली — “हैं ना मेरी नन्ही सी परी” ।

                  फिर हँसते हुए पोती को लेकर चल पड़ी । “उसको   पेड़ के नीचे, लाइट के पास, फव्वारे के नीचे, सब जगह ले जा रही थी” ।

    फ़ोन से फ़ोटो ले रही थी । “उसकी पोती भी नए-नए स्टाइल बना रही थी” । 

                      उनके मन में एक बात ही थी कि कल का कल दिखेंगे । “जो आज अच्छा समय मिला  हैं  उसे उदासी में नहीं गंवाना” ।

    “उनके पति के देहांत हुए 9 साल हो गये थे” । 

                     बेटी विदेश में और बेटे  की शादी  भी किये काफ़ी वक़्त बीत चुका था ।  “लेकिन बहू-बेटे का रिश्ता बच नहीं पाया” । 

      उसने तो बहुत कोशिश की । दोनों को बहुत समझाया । 

     “ पोती के घर में आने से थोड़ा-बहुत माहौल तो बदला लेकिन दूरियाँ कम नहीं हुईं” ।

                  चार सालों से अलग-अलग रह रहे है  दोनों । पोती ज़्यादातर अपनी माँ के पास रहती है । “महीने में दो -तीन दिन आती है अपने पापा के पास” । 

  परिवार के लिए “ख़ुशियों की चाबी”  बनकर  ।

                    अब उसने भी सब वक़्त पर छोड़ दिया ।  सारे छोटे- छोटे क्षणों को  संजोकर रखना चाहती है । 

    “आज ख़ुश रह लेते है । कल का क्या सोचना” ।

    हर बार यही बोलकर मुस्कुरा देती है । 

              “आज भी यही बोलकर मुस्कुरा दीं । पोती के साथ या यूँ कहें कि “उसकी ख़ुशियाँ की चाबी” के साथ हँसते खिल-खिलाते हुए चली गई”॥


Comments

  1. Sachhi khani pe adareet jaise hi hai
    Well written

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  2. Beautiful expressed in words 💕

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  3. Beautifully explained an Indian & British cultural difference, grandmother is a symbol of Indian culture whereas granddaughter is symbol of European culture, you, Manju have a keen eye to observe different cultural values & have critics qualities & is capable of to be regarded.

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