ठाली

                       वैसे तो मैं सैर करते हुए सबसे मिलते हुए ही चलती हूँ । “हाँ ये बात ज़रूर हैं कि ज़्यादा देर खड़ी नहीं होती । लेकिन मिलती ज़रूर हूँ सबसे” ।

   आज  उस समूह की मित्र मंडली से कुछ देर बात की । यही कुछ नौ/दस  दोस्तों का समूह था ।

                       जो  हर रोज़ एक दूसरे को फ़ोन करके इकट्ठे होने का समय तय करते है । साथ-साथ घूमते रहते है ।

       “फिर घर जाने से पहले सीमेंट के  बेंचों पर बैठकर गपशप करते है”।

    “मैं सोचती थी कि उनकी ज़िंदगी बिलकुल बेफिक्र होगी” । 

                     क्योंकि उनके बच्चों के भी बच्चे बड़े हो गये।  “उनकी तो कोई ज़िम्मेदारी ही नहीं रही अब तो “ ।बस समय व्यतीत करते हैं ,कभी घर पर तो कभी दोस्तों के साथ ।

     “ज़्यादातर अपनेआप को  ठाली  ही बोलते रहते थे” । 

                लेकिन उनकी बातें सुनकर लगा , यह तो हमसे भी ज़्यादा व्यस्त हैं । “इनके पास तो नहाने-धोने का भी समय मुश्किल से निकल रहा है”।

      फिर कभी मंदिर जाना है कभी डॉक्टर के पास जाना है ।             

      “रिश्तेदारों  से फ़ोन पर बातचीत करनी है । काफ़ी दोस्तों को फ़ोन करके कार्यक्रम तय करने हैं ।

               बचा-खुचा टाइम टीवी  भी देखनी है । “तय  समय पर सीरियल देखना है जिसका इंतज़ार शाम होते ही  शुरू कर देते हैं”।

     एक भी एपिसोड छूटना नहीं चाहिए । “नहीं तो पता नहीं चलता कि कल क्या हुआ था” । 

                    सब एक दूसरे को बताती रहती थी कि आज क्या देखा और कौन सा ,किस समय आयेगा ।

       “अपनी दवाईयों की पहचान भी लाल-पीली दवाई के हिसाब से की हुई थी” । 

                     अगर किसी को कमर या  घुटने में दर्द हो जाता तो सब दोस्त वैध बन जाते”।  कोई देसी इलाज बताता तो कोई व्यायाम करके दिखाता ।  

         “फिर बारी-बारी से उसके  घर भी जाएंगे क्योंकि उसको डॉक्टर ने मना कर दिया होता है घूमने फिरने से” । 

                  तभी उनमें से एक ने ध्यान खींचा —सुनो बहनों , मेरे पोते का जन्मदिन है अगर तुम सब कुछ समय के लिए मेरे घर आ सकते हो तो । 

    “थोड़ा बैठकर सत्संग भी कर लेंगे और खाना-पीना भी हो जाएगा” ।

                 फिर थोड़ा रुक कर बोली —पहले मैं अपने पोते से पूछ लेती हूँ कि उसने कहीं अपने दोस्तों के साथ बाहर जाने का प्रोग्राम तो नहीं बना लिया ।

       “उसको रोक देती हूँ जाने से  और सबको कल मिलते हैं बोलकर चली गई” ।

                    उसके जाते ही सब आपस में ज़ोर-ज़ोर से बातें करने लगे । “लो जी अब उनका कल का प्रोग्राम तो पक्का ही समझो” ।

                           लगभग 3 घंटे का समय व्यतीत हो जाएगा ।  “ठाली ही तो है  बिल्कुल जाएंगे ,सबने एक साथ मिलकर बोला — हम चलेंगे” ।

       उन्होंने चलते-चलते मुझे भी न्योता दे दिया आप भी आ जाना कल  अगर  समय लगे ।

                         “हम  लोगों के बीच आकर अच्छा लगेगा  आपको भी —हंसते हुए बोला” । फिर एक दूसरे को अलविदा कह कर अपने-अपने घर की ओर चल दिए ।

     “ मैं उनकी बातचीत याद करते हुए अभी भी वहीं ही बैठी थी” । 

                 “काश  मैं भी इन लोगों के  जैसे ठाली ही होती” ।  जिनके पास बिलकुल भी समय नहीं है फिर भी वह अपने आप को “ठाली”  बोल रहे हैं ॥


Comments

  1. One is happy who is busy, Manju, it is your best to have conversation to whom you meet while your routine walk, in this way you can gain practical experience which is the real base of knowledge, so maintain this habit.

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  2. True life routine for fifty plus people
    Very well described

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  3. Beautifully explained ma'am

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  4. Everyone is busy with out anything

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