मैं काम वाली का बेटा
वह सब बच्चों से आगे भाग-दौड़ कर रहा था । “एक-एक रास्ता ,सीढ़ियाँ ,सब कुछ ही पता था उसको” ।
बच्चे जब भी कुछ खाते तो साथ में उसे भी दे रहे थे ।
“जहाँ सब बैठते बैड, सोफा या फिर कॉलिन , वह भी बीच में ही बैठा मिलता” । हमने उसको पहले तो कभी नहीं देखा था ।
हैरानी तो तब हुई , जब हम बच्चों को बुलाकर उनसे मैथ्स के सवाल पूछ रहे थे । पहेली बना-बना कर ।
“ उनको गेम बता कर व्यस्त कर रहे थे ताकि कोई भी तोड़फोड़ न करें” ।
कितने ही सवाल पूछे , सबसे ज़्यादा बार-बार हाथ उसी का खड़ा हुआ । “जितनी बार जवाब दिया बिलकुल सही दे रहा था” ।
“अपने नींद में आने वाले सपने भी ऐसे बता रहा था , जैसे उसके कहनेभर से मुँहमाँगा सपना पूरा होगा” ।
होना भी चाहिए इतना हाज़िर जवाब और आत्मविश्वास है बच्चे में ।
यह सब हमारे चार -पाँच वहाँ बैठे बच्चों में तो नहीं था ।
“ काफ़ी देर तक उसको बच्चों ने रोके रखा” ।
जब भी बोलता — मैं जा रहा हूँ,तभी बच्चे झट से वापस पकड़ लेते ।
“और फिर से सब को गाइड करने लग जाता है —चलो यह करते हैं । नहीं नहीं अब यह कर लेते हैं ,अब हम वैसे गेम खेलेंगे” ।
बीच में काम वाली आकर बच्चों को खाना देकर भी जाती रही । हंस कर उसको देखता और सबके साथ ही खाने लग जाता है ।
काम वाली भी ख़ुश लग रही थी ।
“ उसको सबके साथ मिलकर खेलते हुए” ।
काफ़ी देर के बाद जब रूका नहीं गया तो उसको इशारा करके बुलाया । “बिना देर लगाये ही भाग कर हमारे पास आ गया” ।
आते ही मुस्कुराने लगा —हाँ जी आंटी जी ।
मैंने पूछा -कहाँ रहते हो ? कौन से सेक्टर में ? क्या स्कूल में ही पढ़ते हो इनके साथ । या ट्युशन के साथ जाते हो ?
तभी तो इतना कुछ आता है आपको ।
“इतने सारे सवाल एक साथ कर डाले हमने तो जैसे हम उसका इंटरव्यू ले रहे हो”।
बच्चा मुस्कुरा कर बोला —मैं इनके साथ नहीं पड़ता । किसी सेक्टर में नहीं रहता । “पीछे ही गाँव में बस्ती में एक कमरा है” ।
माँ-पापा के साथ वहीं रहता हूँ ।
“ फिर मैंने पूछा क्या नाम है आपका ? मम्मी पापा कौन हैं क्या करते हैं ? फिर सवालों का पिटारा खोल दिया” ।
तभी काम वाली हंसती हुई पास खड़ी हो गई । लड़के ने भागकर उसका हाथ पकड़ लिया और बोला —
“ मैं काम वाली का बेटा” ।
“और बोलकर अपनी माँ से लिपट गया । उसकी माँ ने भी प्यार से सहला दिया” ।
अब मेरी जिज्ञासा और सवालों की पेटी भी बंद हो गई । “इतने आत्मविश्वास से तो हमारे बच्चे भी जवाब नहीं दे पाते” ।
“बहुत अच्छा लगा देखकर , उसकी बातें सुनकर” ।
उसको जाते हुए तोहफ़ा भी दिया और बच्चों के साथ ही खेलने को भेज दिया ।
“अपनी पहचान “मैं कामवाली का बेटा” बताते हुए जो ख़ुशी उसके चेहरे पर थी” ।
वह तो शायद ही कभी भूल पायेंगे ॥
Nice 👍
ReplyDeleteWow manju great 👍 job
DeleteGreat
DeleteAs always super 👌
ReplyDeleteNice and very thoughtful 👏👏
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