पांए-पाएं की उम्मीद

                   अभी कुछ दिनों से  दिमाग़ एक अलग ही दिशा में सोच रहा था । “एक छोटी सी फ़ोन की घंटी साइरन का काम कर रही थी” ।

        जब फ़ोन की घंटी बजती है तो भागकर हाथ जाता है ।  कभी कट ना जाए ।

       “ऐसा मेरे साथ ही नहीं  बल्कि बहुतों के साथ यही होता होगा” ।

                    फिर से छोटे बच्चे के  जैसे खड़े हो रहे है । बच्चों के  जैसे ही उनको संभाल भी रहे है  । कोशिश करते हैं चलने की लेकिन थक जाते हैं ।

   “बैठने की कोशिश की नहीं करते बल्कि इशारा करके कुर्सी पर बैठ ही जाते हैं” ।

              “ जैसे बच्चा एक-दो क़दम रखते ही धक्के से बैठ जाता है और गुडलिए चलना शुरू कर देता हैं” । 

                     अब आपको बता भी देते  गुडलिए मतलब घुटनों से जब बच्चा चलना शुरू कर देता है ।  “यह हमारी लोकभाषा का एक शब्द है” ।

   शायद आप में से बहुत से लोग जानते भी होंगे ।

        “बिलकुल बच्चे जैसे ही  थकने जैसा बताकर कुर्सी पर बैठ जाते हैं” । 

                और चाहते भी है कि कुर्सी पर बैठाकर उनको घर बाहर , “यहाँ तक कि उनके दोस्तों तक मिलवाकर लाएं” ।

  “ कुर्सी पर बिठाकर ही उनको पार्क में भी सैर करवा दें” ।

                जब छोटा बच्चा चलने की कोशिश करता है तो हम बोलते हैं “कि अब पाएं-पाएं चलना सीख ही जाएगा” । 

                      अब आपको पाएं-पाएं भी बता ही देते हैं । “मतलब पाँव से धीरे-धीरे क़दम रखकर चलना और यह शब्द बच्चा थोड़ी दिनों में समझ भी जाता है” । 

       और जब चलना सीख जाता हैं तो ख़ुद ही बोलना शुरू कर देते हैं पाएं-पाएं और हँसकर कदम रखता है । 

                      ठीक ऐसे ही उनको चलने की कोशिश करता देख हम भी यही बोलते है । “जल्दी-जल्दी चलो ,पाएं-पाएं” ।    घर का एक चक्कर तो लगा कर आ जाओ । 

     “फिर हमें बीच मे टोकते हुए  बोलते है — थोड़ा सा सब्र करो ,   समय लगेगा” । आज ही थोड़ी भाग लूंगा ।

                     जब कभी महसूस करते हैं कि खड़ा हो रहा हूँ अपने आप से  । “तो रुक कर एक-बार सीसा ज़रूर देखते हैं” ।

   ऐसा करते हुए अगर हमने देख लिया,  तो हंस देते हैं । 

 “और तो और फिर शरमाने की एक्टिंग भी करते हैं”।

                      “लेकिन एक बात तो है —उनके अंदर एक हिम्मत तो है । जो सब दिक़्क़तों को- हट पीछे बोलते हुए आगे बढ़ जाती है” । 

                 दिल करेगा  तो बात करते रहेंगे । नही तो सोने की कोशिश करने लगते है ।.

     “और कह देते हैं —अच्छा अब मुझे सोना है तुम भी अब जाओ”  ।  

       और “पाएं पाएं की उम्मीद”  उनकी चमकती आँखों में दिखाई  देती  है ।

                       वैसे तो हमारी उम्मीद , उनकी इच्छा शक्ति के बराबर टक्कर में ही है ।  “लेकिन उनकी अंदरूनी हिम्मत हमारी उम्मीदों से भी कहीं ऊपर है”  …..॥


Comments

  1. Nice & detail description, your acute & keen observation is praise worthy.

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