सुबह
अध्याय २
वह न चाहते हुए भी रह नहीं सकती थी। सभी उसे भोली समझते थे, विश्वास ही नहीं कर सकते थे कि, वह किसी के इतना क़रीब भी हो जाएगी। जब उन्होंने अपनी ज़िंदगी एक साथ बिताने का निश्चय किया तो, घरवालों को बहुत ही आपत्ति हुई। रमेश के माता पिता ने तो एक बार बिलकुल ही मना कर दिया पर ,रमेश के ज़ोर देने पर मान गए। परंतु मीरा के घर वाले तो राज़ी होने को तैयार ही नहीं थे। इसी बीच मीरा को उसके छोटे बेटे ने आकर कहा, "मम्मी -मम्मी" और वह अचानक डर गई। तब उसने देखा कि बच्चे स्कूल से घर लौट आए और खाना माँग रहे थे। परंतु पुरानी यादों में इतना खो गई कि वह समय को ही भूल गई।थोड़ी-सी देर बाद बच्चों के सो जाने पर वह फिर से पुरानी यादों में खो गई। जब उसके पिताजी ने इंकार कर दिया था तो ,वह कुछ भी न कर सकी थीं। जो पहले साथ-साथ चलने और जीने मरने के वायदे कर रही थी,आज चुपचाप सी थी। परंतु एक दिन जब वह ट्यूशन से घर आ रही थी तो, उसने देखा रमेश बिल्कुल बेहोशी की हालत में शराब के नशे में धुत उसके घर के आंगन में पड़ा था। To be continued………..
Can't wait for next chapter ☺️
ReplyDeleteCuriosity bad gyi to know what happened next
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