वह जर्जर
घने गहरे दरख्तों के बीच, उदास और मायूस ,
जर्जर हालत में सूखा हुआ, फिर भी खड़ा सीना ताने
वृक्षों को फलों से लदा देख, गुमशुम सा सोच रहा है ।
पंछियों की चहचहाहट भी वही हुआ करती है
जहाँ फलतीं शाखाओं पर फूल पत्ते मुस्कुराते हैं
नई नई आ रही पत्तियों को चुन चुन कर खाते हैं ,
आने जाने वाले भी रूक जाते, हरे-भरे वृक्ष को देख
थकावट उतारने के लिए वहीं बैठ कर सुस्ताते हैं ।
सूखते वृक्ष का फूल पत्तियां भी साथ छोड़ते जा रही
बाजूओं सी टहनियाँ भी छिटक कर गिर गई
झुक गया ‘कमर सा तना’ जिसके सहारे था खड़ा हुआ ,
सब देखकर हैरान नहीं है “जर्जर होता वृक्ष”
‘धैर्य रख कर’ होते जा रहे बदलाव को
बिना दुःखी हुए सहन करता हुआ,
प्रकृति के जीवन-मरण चक्रव्यूह को
‘ बस ‘ मौन होकर देख रहा है ।।
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Just amazing
ReplyDeleteGreat ,hats off 👍
Privrtn hi niym
ReplyDeleteAmazing lines n it shows reality of our lives.
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