हैप्पी लास्ट दिन

                 फिर से नया साल आने वाला है । पुराने के बस 10 /11  दिन ही तो बचे हैं ।

                 “लेकिन साथ ही बच गईं बहुत सारी ख़्वाहिशें ,सपने”  ।  कह सकते हैं कि उम्मीद जगा कर नए साल का स्वागत किया था ।

                  “एक डायरी तो स्पेशल इसलिए लगायी थी कि जो याद आता रहेगा, साथ-साथ लिखते भी रहेंगे और महीने के हिसाब से पूरा भी कर लेंगे “।

         सोच ही रही थी कि खिड़की से थोड़ी सी धूप चमकती हुई दीवार पर दिखाई दी ।

                 जो सूरज के घूमने के साथ-साथ घूमती जाएगी फिर धीरे से ग़ायब भी हो सकती है । लेकिन फिर यह ख़्याल भी आया है कि कल जब  आएगी तो पहले ही आकर बैठ जायेंगे ताकि धूप का मज़ा ले सके ।

                “जब तक याद आता है तब तक धूप सूरज के साथ सरकती चली जाती है । हमें तो ग़ायब  ही दिखती है” ।

   हमारे साथ ज़िंदगी भी तो कुछ ऐसा ही करती रहती हैं ।

         “कभी-कभी लगता है कि यह ज़िंदगी कुछ जोड़-तोड़ कर के चक्रव्यूह से बाहर नहीं आना चाहतीं”।

                      इतना अच्छा दूध बेचने का धंधा किया था । हर साल काम भी बढ़ ही रहा था । एक पुरे सेक्टर का काम ही काफ़ी था करने को ।

      “लेकिन यह साल तो उम्मीद में ही निकल गया” । कुछ  अच्छा मुनाफा हो  जाए तो गाँव  जाकर आ जाएंगे । 

                        “मकान की मरम्मत करवा देंगे । बेटी भी बड़ी हो गई है । शहर में लेकर आएंगे । बड़ी पढ़ाई भी करवाएँगे”   

      जो ख़ुद ना कर पाये,वह बच्चों के लिए सोचती रहती थी । 

                          “लेकिन मकड़ी के जाले की तरह फिर धीरे-धीरे पूरा सोच-समझ कर बना हुआ प्लान उलझनों से भर जाता है” ।

           “कोई एक रास्ता भी नहीं दिखता जहाँ जाले नहीं लगे हो । चारों चारों तरफ़ बस परेशानी ही परेशानी” ।

        तभी किसी ने ज़ोर से आवाज़ लगाई । जल्दी आओ ज़रूरी काम है । 

                  “मैं भी अपनी दुविधा वाली सोच से बाहर निकलकर हड़बड़ी में साड़ियों  की ओर भागी । पता नहीं किस को क्या हो गया” ।

   जो ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ लगाकर बुला रही है । 

     “चार  सीढ़ियों को दो-दो में लाँघकर झटके से नीचे पहुँच गई”। 

         “बेटी खड़ी-खड़ी मुस्कराकर बोली —“हैप्पी लास्ट दिन” दिसंबर के” ।  

              “अपनी टेंशन छोड़ो । आख़िरी दिन हैपी हैपी रहेंगे । तभी तो नया साल भी हैप्पी आएगा हमारे लिए” ।

                आप हर बात पर बोलते थे ना कि नयें साल में सब कुछ ठीक हो जाएगा । “मन से भी तो सोचो यह सब” ।

      “पहले हर रोज़ लास्ट दिन मनाएंगे फिर उसके बाद हैप्पी न्यू ईयर आ जाएगा” । 

                 “बोल वह  रही थी , उम्मीद मेरे मन में जाग रही थी” ।बस उसी क्षण सब भूलकर उसी के रंग में रंग गई । 

     “कल हम यह करेंगे । अब तो यह कर लेते हैं ।  और उस दिन  तो यह ही पक्का है” ।

  अब डायरी में “हैप्पी लास्ट दिन” बिताने  की लिस्ट लिख रहे थे ॥

      


Comments

  1. Whether you think that will surely be happened/ materialised that is why it is said - always think positively as subconscious Mind gets indulged to attract favourable factors to make the thinking materialise. Manju frame realistic composition & have good experience.

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